Sunday, October 27, 2013

मात्र 3 शर्तों पर अन्ना वहां से भाग लिए और बेफिजूल में जीत का जश्न नाम का ड्रामा दिखाया

"जय गुरु देव" 4 जून 2011, आते आते बाबा रामदेव जी के अनशन में फिर लाखों लोग जमा हो गए , काँग्रेस  कों भय हुआ और रातों रात लाठी चलवा दी हत्या कि साजिश रची गयी ताकि जमा लोगों  कों स्वामी रामदेव जी  जैसा नेतृत्व फिर मिल सके लेकिन स्वामी रामदेव कों मिटाने में कामयाब नहीं  हो पाए जिसका दुःख दिग्विजय सिब्बल जैसे लोगों कों आज भी है | अब कांग्रेस फिर से चिंतित थी किस प्रकार स्वामी रामदेव के समर्थकों कों हमेशा के लिए तोड़ मोड़ दिया जाए और रामलीला में कि अलोकतांत्रिक रूप से रची गयी रावणलीला के दाग कों किसी तरीके से मिटाना हैइसका उपाए में कोंग्रेस कों अन्ना हजारे ही सूझे | अब तो लोग समझ गए कि स्वार्थी सरकार इस देश के लोकतंत्र कों कुचल सकती है | इसके बचाव के लिए फिर अन्ना हजारे कों खड़ा किया गया चुकीं अन्ना टीम में ऐसी लोगों कों भर लिया जो पक्के सरकारी थेतो यह और भी आसान था | 4 जून के एक अन्ना ही बचे थे जो कानून नियम के पालन की बात कर रहे थे | कानून के पालन के बात कों सिद्ध करने के लिए जेल ले जाया गया दुनिया भर कि नौटंकी हुई जिसे शायद अन्ना नहीं समझे लेकिन भूषण अग्निवेश अन्य इस नौटंकी से भली भांति परिचित थे | अन्ना का अनशन शुरू हुआ और सरकार जान भूझ के उनके अनशन कों इतना खींचा एक जगह  स्वामी रामदेव जी 12 घंटे अनशन में रामलीला मैदान से खदेड़ दिये गए और अन्ना 12 दिन तक वहां अनशन करते रहे जिस जगह अन्ना से भी बड़े बड़े धुरंदर पूर्व कानून मंत्री डॉक्टर सुब्रमनियन स्वामी , डॉक्टर हरिओम पवार , पूर्व इनकम टेक्स कमिश्नर और वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के वकील श्री राम जेठ मनाली जी और बहुत सारे ऐसे नाम फिर उसके बाद उसी जगह 27 अगस्त 2011 ,शनिवार अन्ना हजारे अकेले ही अनशन ड्रामा कर रहे थे ! उस ड्रामे में जनता को  आश्वासन दिया गया था! की हम अन्ना हजारे तब तक अनशन नहीं तोड़ेंगे की जब तक लोक पाल पास हो जाए फिर हम जैसे लोगों ने कहा अन्ना जी अनशन तोड़ दीजिये और अपना आन्दोलन चालू रखिये पर अन्ना जी का  ड्रामा तो फिक्स ( FIX ) था कांग्रेस के साथ आप सभी को पता होगा की अन्ना जी  को प्रधान मंत्री पत्र देने वाला व्यक्ति महाराष्ट्र का पूर्व मुख्य मंत्री  विलास राव देशमुख था जिसने शहीद भारतीये सेनिकों  की विधवाओं के मकान हडपे थे आदर्श घोटाले में ऐसे व्यक्ति से पत्र लेकर अपना अनशन ड्रामा ख़तम करना ! और जो व्यक्ति वहां हजारों बार ये कह चूका था की भैया मानसून सत्र में ही लोक पाल पास  होना चाहिए पर नहीं हुआ अन्ना जी ने कहा था की लोक पाल जनता के लिए है इसे  मानसून सत्र में ही पास करो पर सरकार भी तो अपने गले फंदा थोड़ी डालना था लोक पाल को मानसून सत्र में पेश भी नहीं किया गया और मात्र 3 शर्तों पर अन्ना वहां से भाग लिए और बेफिजूल में जीत  का जश्न नाम का ड्रामा दिखाया दुनिया को तो मेने सोच क्या भाई लोकपाल नाम का एक  कानून पास हो गया क्या  जिसे पास करने के लिए अरुण दास और दिनेश यादव नाम के दो देशभक्तों ने अपने प्राणों की आहुति दी पर सब ड्रामा अन्ना का कांग्रेस द्वारा करवाया गया ड्रामा  !

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